जंगल सफारी का बदलेगा अंदाज, राजाजी में सूर्योदय से सूर्यास्त तक घूम सकेंगे पर्यटक

कोटद्वार : अगर आप जंगल सफारी के शौकीन हैं और राजाजी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों को करीब से देखने का सपना रखते हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। आपको बता दें, राजाजी टाइगर रिजर्व में अब फुल डे सफारी शुरू करने की तैयारी चल रही है। रिजर्व प्रबंधन मध्य प्रदेश की तर्ज पर फुल डे सफारी शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। अनुमति मिलने के बाद आगामी पर्यटन सीजन से पर्यटकों को सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल में सफारी का रोमांच मिल सकता है।

चार गेटों से होगी फुल डे सफारी

वर्तमान में राजाजी टाइगर रिजर्व में चीला, मोतीचूर, चिलावाली और रानीपुर गेट से पर्यटकों को सफारी की सुविधा मिलती है। यहां सुबह और शाम दो शिफ्टों में निर्धारित वाहनों के माध्यम से सफारी कराई जाती है। प्रत्येक शिफ्ट करीब चार घंटे की होती है।

अब प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक गेट से दो-दो वाहनों को फुल डे सफारी के लिए अनुमति देने की योजना है। इसके तहत पर्यटक पूरे दिन जंगल में रहकर वन्यजीवों और प्राकृतिक वातावरण का करीब से अनुभव कर सकेंगे।

सूर्योदय से सूर्यास्त तक जंगल में रहेंगे पर्यटक

फुल डे सफारी की सबसे खास बात इसकी अवधि होगी। प्रस्ताव के अनुसार सफारी सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलेगी। यानी पर्यटकों को सुबह की जंगल गतिविधियों से लेकर शाम तक वन्यजीवों को देखने का अधिक समय मिलेगा।

हालांकि, इस विशेष सफारी के लिए सामान्य सफारी की तुलना में शुल्क अधिक रखा जाएगा। शुल्क और अन्य संचालन संबंधी नियमों को प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश की तर्ज पर योजना

राजाजी टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने फुल डे सफारी की योजना तैयार करने के लिए मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्वों में संचालित व्यवस्था को आधार बनाया है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी की सुविधा उपलब्ध है।

उत्तराखंड में फिलहाल किसी भी टाइगर रिजर्व में इस तरह की फुल डे सफारी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में राजाजी में यह सुविधा शुरू होने पर राज्य के वन्यजीव पर्यटन को एक नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।

बढ़ रहा है वन्यजीव पर्यटन

राज्य में सफारी के प्रति पर्यटकों का आकर्षण लगातार बढ़ा है। राजाजी टाइगर रिजर्व में भी पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्तीय वर्ष 2022-23: 6,58,613 पर्यटक

वित्तीय वर्ष 2023-24: 7,17,939 पर्यटक

वित्तीय वर्ष 2024-25: 8,08,324 पर्यटक

आंकड़ों से साफ है कि जंगल सफारी और वन्यजीव पर्यटन उत्तराखंड में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ऐसे में फुल डे सफारी जैसी नई व्यवस्था पर्यटकों के अनुभव को और व्यापक बना सकती है।

पहले प्रस्ताव, फिर अनुमति और शुल्क निर्धारण

राजाजी टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार फुल डे सफारी का प्रस्ताव तैयार कर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा जाएगा। प्रस्ताव को अनुमति मिलने के बाद सफारी का शुल्क और संचालन से जुड़े अन्य नियम तय किए जाएंगे।

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार, अनुमति और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगामी पर्यटन सीजन से इस नई व्यवस्था को लागू करने की योजना है।

“यह सफारी सूर्योदय से सूर्यास्त तक होगी। इसका प्रस्ताव तैयार कर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव के पास भेजा जाएगा। अगर अनुमति मिलती है और इसका शुल्क तय हो जाता है, इसके बाद जब अगला पर्यटन सीजन शुरू होगा, तो उसमें यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी।”

— कोको रोसे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व

 

पर्यटकों को मिलेगा ज्यादा समय, बढ़ेगा इको टूरिज्म

फुल डे सफारी लागू होने के बाद पर्यटकों को निर्धारित चार घंटे की शिफ्ट के बजाय पूरे दिन जंगल को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इससे वन्यजीवों के अलावा राजाजी के जंगल, नदी क्षेत्रों और प्राकृतिक जैव विविधता को देखने का अनुभव भी विस्तृत होगा।

हालांकि, फुल डे सफारी के लिए सीमित वाहनों का प्रस्ताव यह संकेत देता है कि व्यवस्था में पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो आगामी पर्यटन सीजन में राजाजी टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी उत्तराखंड के वन्यजीव पर्यटन का एक नया आकर्षण बन सकती है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

वन भूमि हस्तांतरण व क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण को लेकर डीएम ने ली समीक्षा बैठक, रिजर्व लैंड बैंक को जल्द अपडेट करें- डीएम डॉ. आशीष चौहान

Sat Sep 19 , 2026
देहरादून : परियोजनाओं के निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण के प्रकरणों में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि डिग्रेडेड फॉरेस्ट लैंड […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!