हिंदी दिवस पर पूर्व सैनिक एवं साहित्यकार राम भरोषा कंडवाल को मिला ‘विश्व शांति दूत साहित्य गौरव सम्मान’

कोटद्वार : हिंदी दिवस के अवसर पर पदमपुर मोटाढांक में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। ग्राम्य एकता प्रगति प्रेमांजलि समागम समिति (गेप्स) और देवभूमि उत्कर्ष सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, समाजसेवा और हिंदी भाषा के संरक्षण से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. चंद्रमोहन बड़थ्वाल ने की, जबकि सेवानिवृत्त एडीओ रविंद्र सिंह रावत मुख्य अतिथि रहे।

राम भरोषा कंडवाल को मिला विशेष सम्मान

समारोह का प्रमुख आकर्षण पूर्व सैनिक, शिक्षक, साहित्यकार एवं समाजसेवी राम भरोषा कंडवाल का सम्मान रहा। उन्हें उनकी चर्चित पुस्तक ‘अंगोला में भारतीय शांति दूत’ तथा साहित्य के माध्यम से विश्व शांति और मानवीय मूल्यों का संदेश प्रसारित करने के लिए ‘विश्व शांति दूत साहित्य गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।

सम्मान मुख्य अतिथि रविंद्र सिंह रावत ने प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया युद्ध और हिंसा के खतरे से जूझ रही है, ऐसे दौर में शांति का संदेश देने वाली साहित्यिक कृतियों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि ‘अंगोला में भारतीय शांति दूत’ केवल एक सैनिक के अनुभवों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें विश्व शांति, मानवीय संवेदना और भारत की शांति परंपरा की झलक भी मिलती है।

कविताओं से सजा हिंदी दिवस समारोह

कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. चंद्रमोहन बड़थ्वाल ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया।

डॉ. रमाकांत कुकरेती ने अपनी ओजपूर्ण कविता ‘हिंदुस्तान’ के जरिए श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई। वहीं राम भरोषा कंडवाल ने ‘अपनी भाषा का मान बढ़ाएँ’ कविता प्रस्तुत कर हिंदी के प्रति सम्मान का संदेश दिया।

श्री जगदंबा भारद्वाज ने गढ़वाली रचना प्रस्तुत की, जबकि इंजीनियर जगत सिंह नेगी ने ‘हिंदी का सम्मान करें’ कविता के माध्यम से हिंदी भाषा के गौरव को रेखांकित किया।

हिंदी को जन-अभियान बनाने पर जोर

कार्यक्रम में मनमोहन काला ने हिंदी भाषा के उत्थान और संरक्षण को लेकर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी महज संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना और राष्ट्रीय एकता से जुड़ी महत्वपूर्ण भाषा है।

उन्होंने हिंदी के सम्मान और दैनिक जीवन में इसके अधिकाधिक प्रयोग को जन-अभियान का स्वरूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रमाकांत कुकरेती, इंजीनियर भारत सिंह नेगी और प्रधानाचार्य जगदंबा भारद्वाज मौजूद रहे। कार्यक्रम में साहित्यकारों, समाजसेवियों और स्थानीय गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन हिंदी भाषा के सम्मान, साहित्य के संवर्धन तथा विश्व शांति और मानवीय मूल्यों के संदेश को समाज तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।

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