SDSU के पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर में बौद्धिक संपदा अधिकार पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

  • पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
  • वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अपने मौलिक विचारों और शोध कार्यों को कानूनी रूप से संरक्षित करना अनिवार्य : प्रो एमएस रावत

ऋषिकेश : पंडित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर, ऋषिकेश में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में “बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR)” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राध्यापकों, शोधार्थियों और छात्रों को नवाचार (Innovation) तथा पेटेंट फाइलिंग की बारीकियों से अवगत कराना था।

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय परिसर निदेशक प्रो एम० एस० रावत व यूकॉस्ट के वैज्ञानिक व मुख्य वक्ता हिमांशु गोयल, संकायाध्यक्ष विज्ञान, प्रो. एसपी सती, निदेशक, IQAC व IPR प्रकोष्ठ प्रो. जीके ढींगरा, डॉ. एसके कुडियाल व अन्य द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

इस दौरान श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन के जोशी ने अपने सन्देश में कहा कि इस तरह के आयोजन विश्वविद्यालय में शोध और उद्यमिता के वातावरण को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होंगे । उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने अपने सन्देश में कहा कि ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन राज्य स्तर पर निरंतर किया जा ताकि बौद्धिक संपदा अधिकार पर जागरूकता को बढ़ावा मिले। इसी के साथ उन्होंने सभी को शुभकामनाएं दी I

कार्यशाला के दौरान मुख्य वक्ता/ IPR विशेषज्ञ हिमांशु गोयल, वैज्ञानिक, PIC, यूकॉस्ट ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में प्राचीन भारतीय ज्ञान के भंडार के बारे में चर्चा के उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहां की अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं तथा कल्पनाओं को एक आधारभूत ढांचा बनाने के लिए बौद्धिक संपदा का उपयोग कर हम संरक्षित कर सकते हैं उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में भारत की ओर से लगभग 1 लाख पेटेंट प्रतिवर्ष हो रहे हैं l उन्होंने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिज़ाइन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने यह भी बताया कि नवाचार एवं अनुसंधान के क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकार किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । यह कार्यशाला बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व, पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और अन्य आईपीआर से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर केंद्रित रही। उन्होंने प्रतिभागियों को इन अधिकारों की रक्षा, पंजीकरण प्रक्रिया और नवाचारों के व्यावसायीकरण पर विस्तृत जानकारी प्रदान की ।

कार्यशाला में परिसर निदेशक प्रो एमएस रावत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अपने मौलिक विचारों और शोध कार्यों को कानूनी रूप से संरक्षित करना कितना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि नवाचार को प्रोत्साहन देना आवश्यक हो गया है, उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटा सा मौलिक विचार पेटेंट के माध्यम से व्यावसायिक सफलता प्राप्त कर सकता है । संकायाध्यक्ष विज्ञान, प्रो एसपी सती ने कहा कि यूकॉस्ट की भूमिका अधिक है, उन्होंने कार्यशाला में उत्तराखंड के युवाओं और वैज्ञानिकों को तकनीकी सहायता प्रदान करने में यूकॉस्ट के प्रयासों की सराहना की गई ।

इस अवसर पर IQAC व IPR प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो जीके ढींगरा ने मुख्य अतिथि, वक्ता व समस्त प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया । डॉ एसके कुडियाल ने अपने संबोधन में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए, सभी को नवाचार के लिए प्रेरित किया I अंत में वक्ता ने प्रतिभागियों की जिज्ञासा समाधान का समाधान किया, प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान शोधार्थियों ने अपनी शंकाओं का समाधान किया, जिसमें मुख्य रूप से शोध पत्र प्रकाशित करने और पेटेंट कराने के बीच के अंतर को समझाया गया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के छात्रों, शोधकर्ताओं, फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की I कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए । इस अवसर पर,एमएलटी विभाग प्राध्यापक, शोध छात्र और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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